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(Fun88 Live Casino Online India) 🎖️ Fun88 Kabaddi Unlock the possibilities with our online casino , Rummy Bonus Challenge Lady Luck - Play Today!. Mithun sankranti 2023 : सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में गोचर संक्रांति कहलाता है। वृषभ संक्रांति के बाद अब मिथुन संक्रांति होगी। मिथुन राशि में मृगशिरा नक्षत्र के 2 चरण, आद्रा, पुनर्वसु के 3 चरण रहते हैं। मिथुन संक्रांति के दौरान पुष्य और अष्लेषा नक्षत्र रहेंगे। कब होगी मिथुन संक्रांति और सूर्य की इस मिथुन संक्रांति का क्या है महत्व? कब होगी मिथुन संक्रांति : सूर्यदेव 15 जून 2023 की शाम को 06:07 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन संक्रांति का महत्व : ओड़िसा में मिथुन संक्रांति का महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य से अच्‍छी फसल के लिए बारिश की मनोकामना करते हैं। इस दिन से सभी नक्षत्रों में राशियों की दिशा भी बदल जाएगी। इस बदलाव को बड़ा माना जाता है। सूर्य जब कृतिका नक्षत्र से रोहिणी नक्षत्र में आते हैं तो बारिश की संभावना बनती है। रोहिणी से अब मृगशिरा में प्रवेश करेंगे। मिथुन संक्रांति के बाद से ही वर्षा ऋतु की विधिवत रूप से शुरुआत हो जाती है। मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार मि‍थुन संक्रांति के दौरान वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसीलिए सेहत का ध्यान रखना जरूरी होता है। मिथुन संक्रांति की कथा : प्रकृति ने महिलाओं को मासिक धर्म का वरदान दिया है, इसी वरदान से मातृत्व का सुख मिलता है। मिथुन संक्रांति कथा के अनुसार जिस तरह महिलाओं को मासिक धर्म होता है वैसे ही भूदेवी या धरती मां को शुरुआत के तीन दिनों तक मासिक धर्म हुआ था जिसको धरती के विकास का प्रतीक माना जाता है। तीन दिनों तक भूदेवी मासिक धर्म में रहती हैं वहीं चौथे दिन में भूदेवी जिसे सिलबट्टा भी कहते हैं उन्हें स्नान कराया जाता है। इस दिन धरती माता की पूजा की जाती है। उडीसा के जगन्नाथ मंदिर में आज भी भगवान विष्णु की पत्नी भूदेवी की चांदी की प्रतिमा विराजमान है।

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राजेश से शादी के बाद डिम्पल की 'बॉबी' रिलीज हुई और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। रातों-रात डिम्पल सुपरस्टार बन गईं। युवा लड़के डिम्पल के दीवाने हो गए। 10 How To Play Poker वन्‍य प्राणी विशेषज्ञ, पीसीसीएफ और फॉरेस्‍ट ट्रेनिंग सेंटर प्रमुख, पीके सिंह ने चर्चा में वेबदुनिया को बताया कि एक बाघ को जंगल में कम से कम 70 वर्ग किलोमीटर का एरिया रहने के लिए चाहिए। जिसमें वो वॉक करता है। लेकिन जंगलों की तरफ बढ़ती इंसानी आबादी का दबाव इतना ज्‍यादा हो गया है कि अब बाघों का एरिया सिमट रहा है। ऐसे में उन्‍हें शिकार नहीं मिलता। पीने के लिए पानी नहीं मिलता। मेटिंग के लिए मादा वन्‍य जीव नहीं मिलती, ऐसे में वो भटकता हुआ शहरों की तरफ आ सकता है।